हरिद्वार : आज देवभूमि हरिद्वार में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत पश्चिम उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद शहजाद ने अपने परिवार सहित स्वेच्छा से सनातन धर्म को अंगीकार किया। सर्वप्रथम आज पावन गंगा तट चंडीघाट ब्रह्मकुण्ड पर वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूरे परिवार को गंगाजल से स्नान कराकर शुद्धि की प्रक्रिया आरंभ की गई। इसके उपरांत गौरी शंकर मंदिर गौशाला परिसर में संत राम विशाल दास महाराज के सान्निध्य, अरुण कृष्ण महाराज के मार्गदर्शन में यह शुद्धि कार्यक्रम विधिवत संपन्न हुआ।आचार्य कुलदीप विद्यार्थी एवं अनुज शास्त्री के द्वारा वैदिक यज्ञ का आयोजन कर शास्त्रोक्त विधि से शुद्धि संस्कार सम्पन्न कराया गया।

इस पावन अवसर पर संपूर्ण परिवार का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार भी सम्पन्न हुआ तथा वैदिक परंपरा के अनुरूप नामकरण संस्कार किया गया। मोहम्मद शहजाद का नाम शंकर गुज्जर, उनकी पत्नी रजिया का नाम सावित्री, ज्येष्ठ पुत्री का नाम रुक्मणी, कनिष्ठ पुत्री का नाम दीक्षा तथा पुत्र का नाम रुद्र रखा गया।

इसके पश्चात परिवार का हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पुनः विवाह संस्कार भी सम्पन्न कराया गया, जिसके माध्यम से उन्होंने सनातन जीवन मूल्यों को पूर्णतः अपनाने का संकल्प लिया।

इस गरिमामयी अवसर पर अनेक संत-महात्मा एवं विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों की विशिष्ट उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से बाबा हठयोगी जी महाराज (संरक्षक, अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद), स्वामी प्रबोधानन्द गिरी (अध्यक्ष, अखिल भारतीय सन्त आश्रम परिषद), धर्माचार्य अरुण कृष्ण जी महाराज (संस्थापक, श्री कृष्ण सनातन सेवा ट्रस्ट), वैदिक प्रचारक आचार्य कुलदीप विद्यार्थी जी , वैदिक विद्वान अनुज शास्त्री जी, सनातन धर्म योद्धा रोहित प्रधान जी (सनातन हिन्दू सेवा संघ), श्री कुँवर रसिक चौहान जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, वीर सेना) हिंदू रक्षा सेना के प्रदेश अध्यक्ष राकेश उत्तराखण्डी जी सहित बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी उपस्थित रहे।

सभी संतों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर परिवार का हार्दिक स्वागत किया गया तथा उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया गया।

इस अवसर पर संत राम विशाल दास महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन एवं समावेशी जीवन दर्शन है, जो मानव मात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। जो भी व्यक्ति श्रद्धा, आस्था और सत्य के भाव से इस मार्ग को अपनाता है, उसका सनातन परंपरा में सदैव स्वागत है।

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