देहरादून/हरिद्वार : यूजीसी का ‘समता संवर्धन विनियम 2026’ सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय, हिंदू छात्र परिषद ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
हिंदू छात्र परिषद, उत्तराखंड ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी किए गए ‘समता संवर्धन विनियम 2026’ का कड़ा विरोध किया है। परिषद का मानना है कि यह नया नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के बजाय विभेद और असंतोष उत्पन्न करेगा।
समानता के अधिकार का हनन: हिंदू छात्र परिषद के अनुसार, यह विनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। यह सामान्य वर्ग के छात्रों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करने का एक प्रयास है।
मानसिक उत्पीड़न की आशंका: परिषद का कहना है कि इस नियम के लागू होने से सामान्य वर्ग के छात्रों के भीतर असुरक्षा की भावना पैदा होगी और इसे उनके मानसिक उत्पीड़न के एक हथियार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रहार: इस काले कानून से शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता (Autonomy) समाप्त हो जाएगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
“यूजीसी का यह विनियम राष्ट्रहित में नहीं है। इसका एकमात्र उद्देश्य सामान्य वर्ग के युवाओं को समान शिक्षा के अधिकार से वंचित करना है। हम इसे ‘काले कानून’ की संज्ञा देते हैं और भारत सरकार एवं शिक्षा मंत्रालय से मांग करते हैं कि इसे यथाशीघ्र वापस लिया जाए।”
