हरिद्वार : उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, ऋषिकुल परिसर के पंचकर्म विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर हर्रावाला के परिसर निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) प्रो. (डॉ.) के.के. शर्मा आज अपने 37 वर्षों की गौरवशाली सेवा यात्रा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

 

सेवानिवृत्ति से मात्र दो दिन पूर्व ही उन्होंने अदम्य ऊर्जा और समर्पण के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय पंचकर्म कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन में देश-विदेश से लगभग 500 शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। आयोजन उनकी नेतृत्व क्षमता, सक्रियता और आयुर्वेद के प्रति गहरी निष्ठा का प्रमाण है।

 

29 सितम्बर को महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने प्रो. शर्मा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया। यह सम्मान उनके दीर्घकालीन योगदान और उत्कृष्ट सेवाओं का प्रतीक है।

 

सम्मेलन में कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार त्रिपाठी, पंतजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण, आयुष विभाग के अपर सचिव एवं निदेशक डॉ. विजय कुमार जोगदांडे, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री मदन कौशिक, तथा विधायक श्री आदेश चौहान सहित अनेक वरिष्ठ विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और प्रो. शर्मा की सेवाओं की सराहना की।

 

अपने लंबे कार्यकाल में प्रो. शर्मा ने न केवल अकादमिक क्षेत्र में योगदान दिया बल्कि पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से हजारों मरीजों को नई जिंदगी दी। उनके नेतृत्व में विभाग ने नई ऊँचाइयाँ हासिल कीं और उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई।

 

उनकी सेवानिवृत्ति पर विश्वविद्यालय परिवार, छात्र-छात्राएँ और सहकर्मी भावुक हैं। उनका समर्पण और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

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