हरिद्वार : धर्मनगरी हरिद्वार एक बार फिर जैन धर्म की साधना, तप और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन गई है। श्रमण सेवा समिति पंचपुरी हरिद्वार की ओर से रविवार को वेदा ग्रीन फार्म में परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 गुरु मां विज्ञाश्री माताजी की परम शिष्या आर्यिका 105 विकक्षाश्री माताजी के 24वें चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मन्नू दीदी की गोदभराई की रस्म भी धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई। समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही और पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा एवं उत्साह से सराबोर दिखाई दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रमण सेवा समिति के अध्यक्ष संदीप जैन एकमस ने ध्वजारोहण कर किया। इसके बाद “महिला जैन जागृति मंच” की महिलाओं और बच्चों ने भक्ति एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। धार्मिक गीतों और प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ चातुर्मास का स्वागत किया।

अपने मंगल प्रवचन में आर्यिका 105 विकक्षाश्री माताजी ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और संयम साधना का महापर्व है। उन्होंने कहा कि इन चार महीनों में प्रत्येक श्रावक को अधिक से अधिक धर्म आराधना, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना और तप में समय देना चाहिए। यही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है और यही सच्चा धर्म लाभ है।

समिति के मंत्री समर्थ जैन ने कहा कि हरिद्वार के लिए यह अत्यंत गौरव और सौभाग्य का विषय है कि तप, त्याग और साधना की प्रतिमूर्ति आर्यिका विकक्षाश्री माताजी का चार माह तक सान्निध्य प्राप्त होगा। इससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण सुदृढ़ होगा और समाज को आध्यात्मिक दिशा मिलेगी।
समिति के उपाध्यक्ष पीयूष जैन और रवि जैन ने कहा कि संतों की नगरी हरिद्वार में ऐसे तपस्वी संतों का चातुर्मास समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके सान्निध्य से नई पीढ़ी को संस्कार, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलेगी।
समारोह में मीडिया प्रभारी आदेश जैन, नितेश जैन, बालेश जैन, सतीश जैन, विजय जैन, जे.सी. जैन, रजत जैन, अजय जैन, रूचिन जैन, अंकित जैन, अर्चना जैन, मोना जैन, नीतू जैन, पूजा जैन, ऋतु जैन, प्रियंका जैन, रीना जैन, पारुल जैन, नीरू जैन, कामिनी जैन, रूबी जैन, आरती जैन सहित सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, अनुशासन और सेवा भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
