ऋषिकेश :  महान क्रांतिकारी, अमर स्वतंत्रता सेनानी और अदम्य साहस के प्रतीक चंद्रशेखर आज़ाद जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि उनके जीवन का प्रत्येक अध्याय राष्ट्रप्रेम, त्याग, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए अटूट संकल्प की प्रेरणा देता है। उनका अमर संदेश सदैव युवाओं को राष्ट्रसेवा के पथ पर प्रेरित करता रहेगा।

दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही रहेंगे। यह एक उद्घोष ही नहीं, भारत की आत्मा में बसे स्वाभिमान, साहस, स्वतंत्रता और राष्ट्रनिष्ठा का अमर मंत्र है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि महान समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रभक्त लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” जैसे अमर उद्घोष से करोड़ों भारतीयों के हृदय में स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्वलित करने वाले लोकमान्य तिलक जी ने राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, समाज जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन में अतुलनीय योगदान दिया।

उनका जीवन साहस, त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रसेवा की प्रेरणादायी गाथा है। उनकी विचारधारा और आदर्श सदैव राष्ट्रहित, संस्कृति संरक्षण और समाज उत्थान के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।

वीर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद का जीवन भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का वह प्रकाश स्तंभ है, जिसने यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष से प्राप्त अधिकार नहीं, बल्कि उसे अपने चरित्र, कर्तव्य, अनुशासन और राष्ट्रसेवा से सुरक्षित रखने का संकल्प भी है। उनका अदम्य साहस, अटूट आत्मविश्वास और मातृभूमि के प्रति सर्वाेच्च समर्पण आज भी प्रत्येक भारतीय को अपने दायित्वों के प्रति जागरूक करता है।

आज जब समाज अनेक विचारों, भावनाओं और चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है, तब वीर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद जैसे महान राष्ट्रनायकों का जीवन युवाओं यह दिशा देता है कि युवा शक्ति को सकारात्मक ऊर्जा, रचनात्मक सोच और राष्ट्रहित के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिकों में निहित होती है।

 

वीर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व केवल परिस्थितियों का विरोध करने में नहीं, बल्कि कठिन समय में धैर्य, साहस और विवेक के साथ सही दिशा चुनने में होता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत सुखों का त्याग कर भारत माता की स्वतंत्रता को अपना सर्वाेच्च लक्ष्य बनाया। उनका जीवन प्रेरणा देता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करना ही सच्ची स्वतंत्रता का स्वरूप है।

 

परमार्थ निकेतन की ओर से इस पावन अवसर पर संदेश दिया गया कि आज के युवाओं की ऊर्जा देश के निर्माण, समाज के उत्थान, पर्यावरण संरक्षण, सेवा और मानवता के कल्याण में समर्पित होनी चाहिए। युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति हैं। यदि उनकी प्रतिभा, उत्साह और सामर्थ्य सही दिशा में प्रवाहित हो, तो राष्ट्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

 

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि राष्ट्रप्रेम केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वह हमारे व्यवहार, हमारे कार्यों और हमारे संकल्पों में दिखाई देना चाहिए। समाज में शांति, सद्भाव, करुणा और एकता को मजबूत करना भी राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण स्वरूप है। हमें ऐसी स्वतंत्रता का निर्माण करना है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझे, दूसरों के सम्मान का ध्यान रखे और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान दे।

महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर आइए, हम सभी यह संकल्प लें कि उनके साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं तथा भारत को सेवा, संस्कार और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ाने में अपना योगदान देंगे।

You missed

error: Content is protected !!