हरिद्वार : कर्णप्रयाग में हुए सिख युवकों से जुड़े विवादित मामले को लेकर पंजाब से अकाली दल के नेताओं, विधायकों और प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल हरिद्वार पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने युवकों के साथ कथित मारपीट, पुलिस कार्रवाई और अदालत में पेशी के दौरान हुए व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई है। वहीं हरिद्वार पुलिस प्रशासन का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल की मांग पर वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक की व्यवस्था कर दी गई है और पूरे मामले में संवाद के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। अकाली दल नेताओं का कहना है कि वे किसी विरोध-प्रदर्शन के लिए नहीं बल्कि पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आए हैं। नवनीत सिंह भुल्लर, एसएसपी, हरिद्वार ने बताया कि काफिले के आगमन से पहले कुछ वरिष्ठ नेताओं और सांसदों की ओर से अनुरोध किया गया था कि उनकी एक वरिष्ठ अधिकारी से औपचारिक बैठक कराई जाए। इस अनुरोध पर आवश्यक समन्वय करते हुए बैठक की व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित लोग वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात करना चाहते थे, जिसे सुनिश्चित कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम पूरी तरह तय है और सामाजिक सरोकारों से जुड़े इस आयोजन को किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है, सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से की जा रही हैं। तरसेम सिंह, (वारिश पंजाब दे) के लीडर ने कहा कि पूरे पंजाब में इस मामले को लेकर भारी रोष है और बड़ी संख्या में लोग यहां आने के लिए तैयार थे। लेकिन माहौल खराब न हो और किसी तरह का बड़ा विवाद खड़ा न हो, इसलिए सांसदों, विधायकों और समाज के प्रतिनिधियों ने आपसी सहमति से बातचीत का रास्ता चुना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नौजवानों के साथ घटना हुई, उनके साथ पहले स्थानीय लोगों ने मारपीट की और बाद में पुलिस द्वारा भी दबाव बनाया गया। सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि युवकों के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने बताया कि उनका प्रतिनिधिमंडल डीजीपी से मुलाकात कर पूरे मामले को उनके सामने रखेगा। यदि प्रशासन और सरकार की ओर से न्याय मिलता है तो मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ जाएगा, लेकिन यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार तक भी अपनी बात पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और पंजाब के लोगों के बीच हमेशा भाईचारे और सौहार्द का रिश्ता रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलता है। इसलिए किसी भी तरह नफरत का माहौल नहीं बनना चाहिए। सरकार को निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि लोगों का भरोसा कायम रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मनप्रीत सिंह अयाली एमएलए ( शिरोमणि अकाली दल), पंजाब प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध-प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि पीड़ित युवकों को न्याय दिलाना है। इसी मांग को लेकर वे डीजीपी से मुलाकात करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से बातचीत हुई है और जरूरत पड़ने पर आगे भी संवाद जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाले सिख श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संगत को किसी प्रकार की परेशानी न हो, यह सभी की जिम्मेदारी है। लेकिन हालिया घटना को लेकर पंजाब ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में बैठी सिख संगत के बीच भी गहरा रोष है। आरोप है कि युवकों के साथ मारपीट हुई, उनके खिलाफ एकतरफा मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें अपमानजनक परिस्थितियों में अदालत में पेश किया गया, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सिख समाज हमेशा शांति, भाईचारे और सौहार्द का पक्षधर रहा है। उनकी इच्छा है कि किसी भी समुदाय के साथ अन्याय न हो और किसी भी तरह का तनावपूर्ण माहौल पैदा न होने पाए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और समाज में शांति कायम रहे। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर सिख समुदाय में चिंता और नाराजगी जरूर है, लेकिन सभी चाहते हैं कि मामला कानून और संवाद के जरिए सुलझे। समाज की भावना है कि सभी पक्षों को सुना जाए और न्यायपूर्ण समाधान निकाला जाए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सरबजीत सिंह खालसा (सांसद फरीद कोट), पंजाब प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि वे डीजीपी से मुलाकात कर पूरे मामले को विस्तार से उनके सामने रखेंगे। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि उनकी सभी मांगों और आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाएगा। प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य युवकों को न्याय दिलाना, निष्पक्ष जांच कराना और मामले के सभी पहलुओं को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार संबंधित युवकों ने किसी पर हमला नहीं किया, बल्कि अपने बचाव में कार्रवाई की थी। उनका दावा है कि यदि युवकों ने आत्मरक्षा न की होती तो उनके साथ और गंभीर घटना हो सकती थी। इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह तय किया जाना चाहिए कि चोटें किन परिस्थितियों में लगीं और वास्तविक दोषी कौन हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मामले की गहन जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो हमला करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री स्तर तक भी उठाया जाएगा ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके और किसी भी प्रकार का पक्षपात न हो। उन्होंने यह भी कहा कि युवकों को अदालत में बिना दस्तार (पगड़ी) के पेश किए जाने की खबरों ने सिख समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। इसे समुदाय के सम्मान और धार्मिक अस्मिता से जुड़ा विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि इस संबंध में भी डीजीपी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई जाएगी। उनका कहना है कि न्याय और सम्मान दोनों सुनिश्चित होना चाहिए तथा सभी संवैधानिक अधिकारों का पालन किया जाना चाहिए।

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