श्रीमती दीपा राणा, वादी डॉक्टर यशस्वी धीमान तथा वादिनी जाहिदा ने थाना रानीपोखरी में शिकायती प्रार्थनापत्र दिये कि रानीपोखरी हाट में खरीदारी के दौरान अज्ञात चोरो ने उनके महंगे मोबाईल फोन चुरा लिये हैं, जिस पर थाना रानीपोखरी पर पर क्रमशः मु0अ0सं0 06/2024, मु0अ0स0 07/24 तथा मु0अ0सं0 08/24 धारा 379 आई.पी.सी. पंजीकृत किया गया।

अभियोगों के अनावरण हेतु एसएसपी देहरादून के निर्देशांे पर अलग-अलग टीमों का गठन किया गया, गठित टीमों द्वारा उक्त घटनाओं के सम्बन्ध में स्थानीय व्यक्तियों से जानकारी प्राप्त की गई तो पुलिस टीम को पिछले कुछ समय से हाट बाजार में किसी मोबाइल चोर गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी मिली जिस पर पुलिस टीम द्वारा कुशल सुरागरसी पतारसी करते हुए तथा सड़क किनारे व प्रतिष्ठानों पर लगे लगभग 50-60 सीसीटीवी कैमरे चैक किया गया तथा रायवाला, ऋषिकेश, रानीपोखरी एवं डोईवाला क्षेत्र में लगने वाले हाट बाजारों में सादे वस्त्रों में पुलिस टीमों को नियुक्त कर संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी की गई। साथ ही स्थानीय मुखबिर तंत्र को भी उक्त अभियुक्तों के सम्बन्ध में सक्रिय किया गया।

पुलिस द्वारा किये अथक प्रयासों से दिनांक 21.01.2023 को पुलिस टीम को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली कि तीन पानी पुलिया रायवाला के पास 03 व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में खडे हैं, जो सम्भवतः हाट बाजार में हुई मोबाइल चोरियों में संलिप्त हैं। उक्त सूचना पर पुलिस द्वारा तीन पानी पुलिया के पास से तीन संदिग्ध व्यक्तियो 01-अमर कुमार महतो, 02- सुमित कुमार एवं 03-राजेश कुमार को पूछताछ हेतु हिरासत में लिया गया, जिनकी तलाशी लेने पर उनके पास से अलग-अलग कम्पनियों के कुल 81 मोबाइल बरामद हुए, बरामद मोबाइलों के सम्बन्ध में सख्ती से पूछताछ करने पर अभियुक्तों द्वारा उक्त मोबाइलों को हरिद्वार, ऋषिकेश, रानीपोखरी, रायवाला तथा डोईवाला में लगने वाले हाट बाजारों से चोरी करना बताया गया। तीनो अभियुक्तों को पुलिस द्वारा मौके से गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से पुलिस को रानीपोखरी थाने में पंजीकृत अभियोगों से सम्बन्धित मोबाईल फोन भी बरामद हुए। अभियुक्तों के साथ उक्त घटनाओ में 02 विधि विवादित किशोर जिनकी आयु क्रमश: 14 वर्ष व 16 वर्ष है, भी सम्मिलित थे, जिन्हें पुलिस संरक्षण में लिया गया, गिरफ्तार अभियुक्तों को समय से मां0 न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। विधि विवादित किशोरों का कोई सगा सम्बन्धी उत्तराखण्ड राज्य में नहीं है, जिस कारण उपरोक्त नाबालिग बच्चों को जिला बाल कल्याण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर संरक्षण व सुरक्षा हेतु बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किया गया।