दिनांक: 11-01-24 को प्रबन्धक भवदीय शिव दुर्गा मन्दिर देहरादून रोड ऋषिकेश के द्वारा कोतवाली ऋषिकेश में लिखित तहरीर दी गई कि 70 वर्ष पुराने प्राचीन शिव दुर्गा मन्दिर में दिनांक: 10-01-24 की सांय एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा मंदिर में रखी मूर्ति को पत्थर से खण्डित कर मौके से भाग गया। प्राप्त तहरीर के आधार पर तत्काल कोतवाली ऋषिकेश में सम्बन्धित धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया।

घटना के धार्मिक अस्थाओं से जुड़ा होने के कारण लोगों में प्रतिक्रिया परिलक्षित होने तथा कानून व्यवस्था की स्थिती प्रभावित होने की सम्भावना के दृष्टिगत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा घटना के अनावरण हेतु प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश को आवश्यक दिशा-निर्देश हुए तत्काल 04 अलग-अलग टीमों का गठन किया गया।

गठित टीमों द्वारा घटना के अनावरण हेतु त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना स्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेजों का अवलोकन करते हुए मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया तथा ऋषिकेश क्षेत्रार्न्गत अलग- अलग स्थानों पर चैकिंग अभियान चलाते हुए संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई। दौराने चैकिंग पुलिस टीम को सीसीटीवी फुटेज से प्राप्त संदिग्ध के हुलिये से मेल खाता 01 व्यक्ति मिला, जिसे पुलिस द्वारा संरक्षण में लेकर उससे आवश्यक पूछताछ की गई तो उक्त व्यक्ति का मानसिक रूप से विक्षिप्त होना ज्ञात हुआ। पुलिस द्वारा किये गये काफी प्रयासों के बाद उक्त व्यक्ति की पहचान नयन कुमार पुत्र जगदीश भाई निवासी: भावनगर गुजरात के रूप में हुई।

पुलिस टीम द्वारा स्थानीय गुजरात पुलिस से सम्पर्क कर उक्त व्यक्ति के सम्बन्ध में जानकारी की गई तो उक्त व्यक्ति का विगत 07 वर्षों से अपने घर से लापता होना तथा इस सम्बन्ध में भावनगर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज होना ज्ञात हुआ, पुलिस टीम द्वारा उक्त व्यक्ति के परिजनो से सम्पर्क कर उन्हें ऋषिकेश बुलाया गया। आज दिनांक: 17-01-24 को उक्त व्यक्ति के परिजन कोतवाली ऋषिकेश पर आये, जिनके द्वारा उसके मानसिक रूप स विक्षिप्त होने तथा गुमशुदगी से पूर्व उसका मानसिक उपचार चलने के सम्बन्ध में जानकारी दी गई।

पुलिस द्वारा वादी प्रबन्ध भवदीय दुर्गा मन्दिर को ऋषिकेश कोतवाली बुलाकार उक्त व्यक्ति के परिजनों से मिलवाते हुए उसके मानसिक रूप से विक्षिप्त होने की जानकारी दी गई, जिस पर वादी द्वारा मानवीय संवेदना के आधार पर उक्त व्यक्ति के विरूद्ध कोई कानूनी कार्यवाही न चाहने तथा उक्त व्यक्ति को उसके परिजनो के सुपुर्द करने के लिये हामी भरी गई। पुलिस द्वारा मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति नयन कुमार को उसके पिता जगदीश भाई के सुपुर्द किया गया। 07 वर्षों के पश्चात अपने पुत्र को सकुशल पाकर उसके पिता व अन्य परिजन भावुक हो गये तथा उनके द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस के मानवीय दृष्टिकोण तथा कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए आभार व्यक्त किया गया।